Skip to main content

Posts

Showing posts with the label daily articles

किसी पर विश्वास मत करो

किसी पर विश्वास मत करो   एक बार एक व्यापारी, अपने ऊँट के साथ जंगल से गुजर रहा था। उसने ऊंट को जंगल में छोड़ दिया, चूंकि यह बीमार था और खुद ही अपनी यात्रा जारी रखी। इसने जंगल में जो कुछ भी उपलब्ध था, खा लिया। जल्द ही ठीक हो गया, और खुश था। शेर, लोमड़ी और कौआ, उसी जंगल में एकता में रह रहे थे। उन्हें ऊंट के बारे में पता चला और उन्होंने उससे पूछताछ की। ऊंट ने घटना बताई, और चारों अच्छे दोस्त बन गए। एक दिन, जब शेर ने एक हाथी का शिकार किया, यह बहुत बुरी तरह से आहत हो गया। इसलिए, वह अपनी मांद के अंदर ही रहा और बाहर नहीं आ सका। इसलिए, शेर शिकार करने बाहर नहीं जा सकता था। दूसरे जानवर शिकार नहीं कर सकते थे, और वे सभी भूखे रह गए। शेर ने लोमड़ी, कौआ और ऊंट को बुलाया। “Mr.Fox, मुझे बहुत भूख लगी है,” “इस दिशा में जाओ और मुझे कुछ खाने को दो”। “Mr.Crow, आप दूसरी दिशा में जाएं” “मि। मिसेल, आप विपरीत दिशा में जाते हैं, और कुछ मिलता है। ” आप तीनों, भोजन करके लौट आएं। ठीक है, अब आप जा सकते हैं। तीनों अलग-अलग दिशाओं में गए, कुछ खाने को नहीं मिला।  वे फिर से एक साथ मिले, और एक निर्णय लिया। तदनु...

आधी रोटी

 आधी रोटी कालू कौआ बहुत भूखा था। उसने इधर-उधर देखा। सामने एक लड़की रोटी खाने के लिए बैठी थी। उसने रोटी सामने रखी। अपनी सहेली को आवाज दी।  जैसे ही उसने पीछे मुंह घुमाया, वैसे ही कालू कौए ने रोटी झपट ली। वह तेजी से उड़ा और पेड़ पर बैठ गया। यह देखकर लड़की रोने लगी। वह उठकर कौए के पीछे भागी। पत्थर उठाया। कालू को दे मारा। कालू तुरंत उड़ा। दूसरे पेड़ पर जाकर बैठ गया। जिस पेड़ पर कालू बैठा था, उसी पेड़ के नीचे पूसी बिल्ली बैठी थी। उसने कालू कौए के मंुह में रोटी देख ली थी। इसलिए बोली, “कालू भाई, कालू भाई! आज अपना प्यारा राग नहीं सुनाओगे?” आवाज सुनकर कालू ने पूसी की ओर देखा। वह उसी की ओर देखकर बोल रही थी। मगर कालू चुप रहा। वह बोलता, तो रोटी मुंह से छूट जाती। “क्या गाना गाना भूल गए कालू भाई?” पूसी ने पूंछ उठाकर बड़े प्यार से पूछा। कालू फिर भी चुप रहा। वह कुछ नहीं बोला। पूसी बिल्ली ने दोबारा कहा, “क्या मेरी इच्छा पूरी नहीं करोगे?” मगर कालू चुप ही रहा। “अरे, काले कलूटे! बोलता क्यों नहीं है? मैं तो बड़े प्यार से बोल रही हूं। इधर तू है कि अपने कालेपन पर इतरा रहा है।” पूसी  चिल्लाई। काल...

ठाकुर जी और मैं

 ठाकुर जी और  मैं ठाकुर जी एक कटोरे में मिट्टी लेकर उससे खेल रहे थे। मैंने पूछा :- गोपाल जी ये क्या कर रहे हो ? ठाकुर जी कहने लगे :- मूर्ति बना रहा हूँ। मैंने पूछा :- किसकी ? उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरी ओर देखा। और कहने लगे :- एक अपनी और एक तुम्हारी। मैं भी देखने के उद्देश्य से उनके पास बैठ गया। अब ठाकुर जी ने कुछ ही पल में दोनों मूर्तियाँ तैयार कर दी।और मुझसे पूछने लगे :- बताओं कैसी बनी है ? मूर्ति इतनी सुंदर मानों अभी बोल पड़ेंगी।परन्तु मैंने कहा:- मजा नहीं आया।इन्हें तोड़ कर दुबारा बनाओ। अब ठाकुर जी अचरज भरी निगाहों से मेरी ओर देखने लगें।और सोचने लगे कि मेरे बनाए में इसे दोष दिखाई दे रहा हैं। परन्तु उन्होंने कुछ नहीं कहा।और दोबारा उन मूर्तियों को तोड़कर उस कटोरे में डाल दिया।और उस मिट्टी को गुथने लगें। अब उन्होंने फिर से मूर्तियाँ बनानी शुरू की।और हुबहू पहले जैसी मूर्तियाँ तैयार की। अबकी बार प्रश्न चिन्ह वाली दृष्टि से मेरी ओर देखा ? मैंने कहा:- ये वाली पहले वाली से अधिक सुंदर है। ठाकुर जी बोले :- तुम्हें कोई कला की समझ वमझ हैं भी के नहीं।इसमें और पहले वाली में मैंने रति भ...

जल की मिठास

जल की मिठास   एक शिष्य अपने गुरु से सप्ताह भर की छुट्टी लेकर अपने गांव जा रहा था। तब गांव पैदल ही जाना पड़ता था। जाते समय रास्ते में उसे एक कुआं दिखाई दिया। शिष्य प्यासा था, इसलिए उसने कुएं से पानी निकाला और अपना गला तर किया। शिष्य को अद्भुत तृप्ति मिली, क्योंकि कुएं का जल बेहद मीठा और ठंडा था।  शिष्य ने सोचा - क्यों ना यहां का जल गुरुजी के लिए भी ले चलूं। उसने अपनी मशक भरी और वापस आश्रम की ओर चल पड़ा। वह आश्रम पहुंचा और गुरुजी को सारी बात बताई। गुरुजी ने शिष्य से मशक लेकर जल पिया और संतुष्टि महसूस की। उन्होंने शिष्य से कहा- वाकई जल तो गंगाजल के समान है। शिष्य को खुशी हुई। गुरुजी से इस तरह की प्रशंसा सुनकर शिष्य आज्ञा लेकर अपने गांव चला गया।  कुछ ही देर में आश्रम में रहने वाला एक दूसरा शिष्य गुरुजी के पास पहुंचा और उसने भी वह जल पीने की इच्छा जताई। गुरुजी ने मशक शिष्य को दी। शिष्य ने जैसे ही घूंट भरा, उसने पानी बाहर कुल्ला कर दिया। शिष्य बोला- गुरुजी इस पानी में तो कड़वापन है और न ही यह जल शीतल है। आपने बेकार ही उस शिष्य की इतनी प्रशंसा की।  गुरुजी बोले- बेटा, मिठास ...

वर्चुअल दुनिया से बाहर

 वर्चुअल दुनिया से बाहर साहिल स्कूल से आते ही मम्मी का मोबाइल लेकर गेम खेलना शुरू कर देेता या सोशल साइट्स पर चैटिंग करने लगता। एक बार वह खेलने बैठता, तो घंटों तक खेलता ही रहता। उसे न होमवर्क की चिंता रहती और न ही खाने की। फुटबॉल खेलना, गिटार बजाना और मोबाइल पर गेम खेलना उसकी  हॉबी थी। पर अब वह सब कुछ भूलकर सुबह से लेकर शाम तक बस मोबाइल पर ही खेलता रहता। मम्मी-पापा दोनों के मना करने के बावजूद साहिल नहीं मानता। अपनी इस आदत की वजह से वह पढ़ाई में भी पिछड़ता जा रहा था। फिजिकल एक्टिविटी न होने से उसका वजन भी लगातार बढ़ता जा रहा था। मम्मी चाहती थीं कि साहिल खेलने के साथ-साथ पढ़ाई और अपनी हेल्थ पर भी ध्यान दे। पर साहिल उनकी कोई बात मानने को तैयार ही नहीं था। मम्मी अब उसे समझाने के लिए कोई और तरीका सोच रही थीं। परीक्षा खत्म हो चुकी थी। इस बार छुट्टियों में मम्मी-पापा साहिल को लेकर गांव जाने की योजना बना रहे थे। दरअसल मम्मी चाहती थीं कि साहिल इस बार छुट्टियां दादाजी के साथ बिताए। उनके साथ गांव घूमे। उनसे अच्छी आदतें सीखे और जैसे वे फिट रहते हैं, वैसे ही साहिल भी रहे।  छुट्टियों मे...

जो होता है अच्छा होता है

 जो होता है अच्छा होता है एक बार अख़बर और बीरबल शिकार पे जा रहे होते हैं। और अख़बर का अंगूठा कट जाता है। तलवार निकालते वक़्त…वो वॉखला जाता। चीखने-चिल्लाने-लग जाता हैं कहता-हैं सिपाहियों जल्दी जाओ-जाकर वेद को बुलाकर लाओ देखो मेरा अँगूठा कट गया है! देखो मेरी क्या हालत हो गयी। उधर से बीरबल आता है। हँसता हुआ,बोला- महाराज जो होता हैं। अच्छे के लिए होता है। अख़बर-बीरबल तू क्या पागल हो गया है, मैं तुझे अपना समझता था और तू कैसी बेकार बातें कर रहा है। अख़बर- एक काम करो सिपाहियों वेद को छोड़ो पहले इस बीरबल को ले जाओ ले जाकर के इसे उल्टा लटका दो पूरी रात के लिए और इसको कोड़े मारते रहना… और सुबह-सुबह इसको फाँसी दे देना। सिपाही ले जाते हैं। बीरबल को…..उधर से अख़बर शिकार पे अकेला चला जाता है। अख़बर को कुछ आदिवासी पकड़ के ले जाते हैं।और उल्टा कर के लटका देते हैं। अब वहाँ आदिवासीयो का डांस चल रहा हैं। इतने में एक आदिवासी की नज़र पड़ती हैं! अख़बर के कटे हुए अंगूठे की तरफ़। आदिवासी-अरे ये तो आसुद हैं। हम इसकी वली नहीं चढ़ा सकते छोड़ दो इससे अख़बर को छोड़ दिया जाता हैं। अब अख़बर रो रहा है सुबह का टाइ...

फ़ालतू का ज्ञान

 फ़ालतू का ज्ञान एक बार की बात है एक जंगल में बुलबुल नाम की चिड़िया रहती थीं, ठंड का मौसम आने वाला था सभी जानवर उससे बचने के लिए तैयारी करने लगे। बुलबुल ने भी एक शानदार घोसला बनाया और आने वाली बारिश से बचने के लिए उसे चारो तरफ से घास से ढक दिया।औ एक दिन अचानक बहुत घनघोर वर्षा शुरू हो गई जिससे बचने के लिए सभी जानवर इधर उधर भागने लगे, बुलबुल आराम से अपने घोसले में बैठ गई। तभी एक बंदर खुद को बचाने के लिए उस पेड़ के नीचे आ पहुंचा। बंदर की हालत देख बुलबुल ने कहा- तुम इतने होशियार बने फिरते हो फिर भी बारिश से बचने के लिए घर नहीं बनाया। ये सुनकर बंदर को बहुत गुस्सा आया पर वह चुप रहा। बुलबुल फिर बोली पूरी गर्मी आलस में बिता दी अच्छा होता अपने लिए घर बना लेते। बंदर ने अपने गुस्से को काबू किया और चुप रहा। वर्षा रुकने का नाम नहीं ले रही थी और हवाएं और तेज हो रहीं थी, बेचारा बंदर ठंड से कापने लगा, पर बुलबुल ने तो मानो कसम खा रखी थी उसे छेड़ने की। बह फिर बोली तुमने थोड़ी अक्ल दिखाई होती तो इस हालत… बुलबुल ने अपनी बात खतम भी नहीं की थी के बंदर पेड़ पर चढ़ गया और बोला- भले मुझे अपना घर बनाना नहीं...

राजकुमार और सोना

 राजकुमार और सोना बहुत पहले, एक जंगल में एक जादूगरनी रहती थी। उसकी, सोना नाम की एक बहुत सुंदर भतीजी थी। एक बार उस राज्य का राजकुमार वहाँ आया और सोना से मिला। दोनों एक दूसरे को पसन्द करने लगे। राजकुमार ने कहा- "मैं अपने माता-पिता को तुम्हारे बारे में बताऊँगा। फिर मैं तुमको उनके पास लेकर जाऊँगा।" सोना ने कहा-"तुम अपनी बहन को मत छूना, नहीं तो एक जादू के प्रभाव से तुम मुझे भूल जाओगे।" राजकुमार, सोना की चेतावनी को भूल गया। उसने अपनी बहन का हाथ छू लिया और वह सोना को भूल गया। राजा ने राजकुमार के लिए एक राजकुमारी को चुन लिया और विवाह की तैयारी शुरु कर दी। जब सोना को यह पता चला तो उसने महल में एक केक भेजा। जब केक काटा गया तो दो चिड़ियाँ वहाँ आई। एक चिड़िया ने दूसरी से कहा-"केक मत खाना वरना तुम मुझे वैसे ही भूल जाओगे जैसे राजकुमार सोना को भूल गया।" इतना सुनते ही राजकुमार को सोना की याद आ गई। वह राजा के साथ जंगल में गया और सोना से मिला। राजा दोनों को महल में ले आये और उन दोनों का विवाह कर दिया।

आप से बढ़कर कुछ नहीं

  आप से बढ़कर कुछ नहीं एक बार कि बात है- एक आदमी कही से गुज़र रहा था,तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा के उनके अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई हैं। उसे इस बात का बड़ा आश्चर्य हुआ के हाथी जैसे ताक़तवर जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं। उसने पास खड़े एक किसान से पूछा, के भला ये हाथी किस तरह इतनी शांति से खड़े हैं और भागने की कोसिस क्यो नहीं कर रहे? किसान बोला- इन हाथियों को छोटे पन से ही ये रस्सियों से बांधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती हैं के इस बंधन को वो तोड़ सके। बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी न तोड़ पाने की वजह से उन्हें धीरे-धीरे ये यक़ीन हो जाता हैं के वो इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते, और बड़े होने पर भी इनका ये यकीन बना रहता है! इसलिए वो कभी इन्हें तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते। वह आदमी आश्चर्य में पड़ गया, के ये जानवर इसलिए रस्सी नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात पर यकीन करते हैं, के वो ऐसा नहीं कर सकते। इन हाथियों की तरह ही हम में से कई लोग पहली बार मिली असफलता के कारण ये मान बैठते हैं के अब हमसे ये काम नहीं हो सकता। और अपनी ह...

रेलगाड़ी

  रेलगाड़ी पिंकी बहुत प्यारी लड़की है। पिंकी कक्षा दूसरी में पढ़ती है। एक दिन उसने अपनी किताब में रेलगाड़ी देखी।  उसे अपनी रेल – यात्रा याद आ गई , जो कुछ दिन पहले पापा – मम्मी के साथ की थी। पिंकी ने चौक उठाई और फिर क्या था , दीवार पर रेलगाड़ी का इंजन बना दिया। उसमें पहला डब्बा जुड़ गया , दूसरा डब्बा जुड़ गया , जुड़ते – जुड़ते कई सारे डिब्बे जुड़ गए। जब चौक खत्म हो गया पिंकी उठी उसने देखा कक्षा के आधी दीवार पर रेलगाड़ी बन चुकी थी। फिर क्या हुआ  – रेलगाड़ी दिल्ली गई  ,  मुंबई गई   ,   अमेरिका गई  ,  नानी के घर गई ,  और दादाजी के घर भी गई।    नैतिक शिक्षा – बच्चों के मनोबल को बढ़ाइए कल के भविष्य का निर्माण आज से होने दे। Moral of this short hindi story – Boost confidence of children because they are future

मुर्गा की अकल ठिकाने

  मुर्गा की अकल ठिकाने एक समय की बात है , एक गांव में ढेर सारे मुर्गे रहते थे। गांव के बच्चे ने किसी एक मुर्गे को तंग कर दिया था। मुर्गा परेशान हो गया , उसने सोचा अगले दिन सुबह मैं आवाज नहीं करूंगा। सब सोते रहेंगे तब मेरी अहमियत सबको समझ में आएगी , और मुझे तंग नहीं करेंगे। मुर्गा अगली सुबह कुछ नहीं बोला।  सभी लोग समय पर उठ कर अपने-अपने काम में लग गए इस पर मुर्गे को समझ में आ गया कि किसी के बिना कोई काम नहीं रुकता। सबका काम चलता रहता है। नैतिक शिक्षा – घमंड नहीं करना चाहिए। आपकी अहमियत लोगो को बिना बताये पता चलता है। Moral of this short hindi story – Never be too arrogant. Your work should tell your importance to the world.

नीलकंठ और मोर

 नीलकंठ और मोर                     नीलकंठ और मोर एक समय की बात है… एक नीलकंठ ने मोरों को नाचते हुए देखा। वह उनके सुंदर पंखों से मोहित हो गया। वह घूमता-घूमता मोरों के रहने की जगह पहुँचा। वहाँ उसने मोरों के ढेर सारे पंख गिरे हुए देखे। नीलकंठ ने सोचा कि यदि मैं इन पंखों को लगा ले तो मैं भी मोरों की तरह सुंदर बन जाऊँगा। यह सोचकर उसने सभी पंखों को उठाया और अपनी पूँछ के चारों ओर रखकर बाँध लिया। फिर ठुमकता हुआ वह मोरों के बीच पहुँचा और उन्हें घूम-घूमकर दिखाने लगा। मोरों ने उसे पहचान लिया और चोंच से मारना शुरु कर दिया। चोंच मारने के साथ वे बँधे हुए पंखों को भी खींचते जाते थे। सारे पंख निकालकर ही वे शांत हुए। नीलकंठ के भाई-बंधु दूर से यह तमाशा देख रहे थे। नीलकंठ दुखी मन से अपने भाई बंधु के बीच पहुँचा। सभी उससे नाराज थे उन्होंने कहा, “सुंदर पक्षी बनने के लिए मात्र सुंदर पंख आवश्यक नहीं है। ईश्वर ने सबको अलग-अलग सुंदरता दी है।” Moral  शिक्षा : स्वाभाविक रहें, और दूसरों की नकल न करें।

चिड़िया की परेशानी

  चिड़िया की परेशानी  चिड़िया एक चिड़िया थी वह बहुत उच उड़ती , इधर उधर चहचहाती रहती | कभी इस टहनी पर कभी उस टहनी पर फुदकती रहती |पर उस चिड़िया की एक आदत थी वह जो भी दिन में उसके साथ होता अच्छा या बुरा उतने पत्थर अपने पास पोटली में रख लेती और अकसर उन पत्थरो को पोटली से निकाल कर देखती अच्छे  पत्थरो को देखकर बीते दिनों में हुई अच्छी बातो को याद करके खुश होती | और खराब पत्थरो को देखकर दुखी होती |ऐसा रोज़ करती | रोज़ पत्थर इकठा करने से उसकी पोटली दिन प्रतिदिन भारी होती जा रही थी | थोड़े दिन बाद उसे भरी पोटली के साथ उड़ने में दिक्कत होने लगी | पर  उसे समझ नहीं आ रहा था की वह उठ क्यों नहीं पा रही | कुछ समय और बीता, पोटली और भारी होती जा रही थी | अब तो उसका जमीन पर चलना भी मुश्किल हो रहा था | और एक दिन ऐसा आया की वह खाने पीने का इंतज़ाम भी नहीं कर पाती अपने लिए और अपने पत्थरो के बोझ तले मर गयी . Moral दोस्तों ऐसा ही हमारे साथ होता है जब हम पुरानी बातो की पोटली अपने साथ रखते है | अपने वर्तमान का आनंद लेने की जगह भूतकाल की बातो को ही सोचने में लगे रहते हैं | इस पल का आन्नद लीज...

short story for kids | चतुर खरगोश | हिंदी नैतिक कहानियाँ

चतुर खरगोश एक जंगल के पास एक सुंदर सा द्वीप था । उस जंगल और द्वीप के बीच में एक तालाब था । उस द्वीप पर जाने के लिए सबको वह तालाब पार करना पड़ता ।उस द्वीप पर खूब सारे स्वादिष्ट फल और सब्जियां थे । उस जंगल में रहने वाले सारे पशु उस द्वीप से फल सब्जियां खाना खाते थे । पर कभी किसी ने हिम्मत नहीं करी  । क्योंकि उस तालाब में कई सारे मगरमच्छ रहते  थे ।  एक दिन एक खरगोश जो उसे जंगल में रहती थी । उस तालाब से पानी पीने गई उससे वह द्वीप देखा और सोचने लगी  मुझे उस द्वीप पर जाकर सारे फल सब्जियां खाने हैं । मगर यह मगरमच्छ को कैसे चकमा दिया जाए । फिर बहुत सोचने पर खरगोश ने एक तरकीब सोची । अगली सुबह वह खरगोश तालाब के किनारे आई । उसने सारे मगरमच्छ को चिल्लाकर बुलाया किसके पास इतनी हिम्मत है । जो हमें ऐसे बुला रहा है । मगरमच्छो  ने सोचा और तालाब के किनारे आ गए । आप सब वादा करो कि मुझे हानि नहीं पहुंचा । ओगे वह अपनी होशियारी के साथ यह सब बोलना शुरू हो गयी ।  हां हां तुम चिंता मत करो बताओ क्या बात है । "एक मगरमच्छ बोला" जंगल के राजा ने सब जानवरों के लिए एक दावत देने का सो...

a short stories with moral for kids | moral stories

                                                            1.  a thirsty crow a thirsty crow you there was a crew on a very hot summer day, he was feeling very thirsty he flew from place to place in search of water but he could not find it anywhere. he was very sad and disappointed at not getting a single drop of water suddenly. he saw a jar of water he flew down to the jar and sat on its edge when, he creamed his beak to quench his thirst he saw to his great discouragement that the water was at the bottom this beak could not reach such a low level of water. he even tried to overturn the jar but he could not it was too heavy for him to move when he was almost to fly in despair, he thought of an idea suddenly his eyes received some pebbles lying near the jar, they picked up two pebbles one-by-one and drop them into jar slowly and slo...

lion and mouse moral story| short story with moral for kids |

                                                        lion and mouse  moral  story           the lion and the mouse a lion sleeping in a forest a small mouse crept up to him since he's sleeping thought the mouse he never suspected him herewith that the little mouse began running up and down upon him this soon weakens the lion and quickly got the mouse between its claws pardon okay let me go set the mouse andI'll come back and help you someday thelion laughed ha ha ha you are so small how could you ever help me the line was so tickled at the idea of the mouse having the ability to assist him that he lifted up his paw and let him go sometime after the road was caught during a net spread by a hunter he roared he wept but he couldn't pull himself free just then the little Mouse happened to pass by and seeing th...

मूर्तिकार पिता और बेटे की कहानी | a short story with moral in hindi

मूर्तिकार पिता और बेटे  की  कहानी  एक गांव में एक मूर्तिकार रहा करता था । वह काफी खूबसूरत मूर्तियां बनाया करता था । और इस काम से वह अच्छा कमा लेता था । उसे एक बेटा हुआ उस बच्चे ने बचपन से ही मूर्तियां बनानी शुरू कर दी । बेटा भी बहुत अच्छी मूर्तियां बनाया करता था और बाप अपने बेटा  की कामयाबी पर खुश होता था । लेकिन हर बार बेटे की मूर्तियों में कोई ना कोई कमी निकाल दिया करता था । वह कहता था बहुत अच्छा किया है । लेकिन अगली बार इस कमी को दूर करने की कोशिश करना बेटा कभी कोई शिकायत नहीं करता था । वह अपने बाप की सलाह पर अमल करते हुए अपनी मूर्तियों को और बेहतर करता रहा । इस लगातार सुधार की वजह से बेटे की मूर्तियां बाप से भी अच्छी बनने लगी और ऐसा टाइम भी आ गया कि लोग बेटे की मूर्तियों को बहुत पैसा देकर खरीदने लगे । जबकि बाप की मूर्तियां उसकी पहली वाली  कीमत पर ही बिकती रही । बाप बेटे की मूर्तियों में कमियां निकाल ही देता था । लेकिन बेटे को अब  अच्छा नहीं लगता था और वह बिना मन के उन कमियों को सुविकार करता  था । लेकिन फिर भी अपनी मूर्तियों में सुधार कर ही देता था ...

Three Activities to do today! | Covid-19 Lockdown

Take your time out to try doing these three things today one a teacher once asked a boy which is your favorite book the boy said my father's checkbook. I think it's time to pick up some other book to read guys read at least 50 pages, try and do it daily and turn it into a habit make sure that the book is uplifting and not depressing there's a lot of negative energy all around us at this point of the time anyway don't add anymore number to organize your phone or your laptop sometimes we think that our gadgets become like a black hole which can keep taking more photos more videos5 ways that you can save there and then one day the illusions are broken when we suddenly get a message saying that the memories for take some time out to organize your photos videos and files delete them or transfer them make more space declutter and guess what forming this tiny habit of organizing your phone will need to something much larger than your phone you'll probably start organizing ...

story of a bird and a man | moral stories| short story with moral

 story of a bird and a man a man was once walking in a forest and he happened to see an exotic bird being very charmed by it and wanting to have it as a pet he tiptoed towards it from behind and caught it to his utter surprise, the bird started talking and it said to him please release me in return I shall give you three gems three valuable pieces of advice that can transform your life I'll give you the first one only when you let me go the second one when I fly up to that branch and the third one when I fly up high to the very top of the stream the man instantly agreed and let the bird go as soon as it was freed the bird started flying up as it said here's,  the first jet my first piece of advice do not torture torment and burden yourself with excessive regret for your past mistakes as the man pondered over what he had just heard the bird flew up sat on a branch and spoke back and the second one does not believe anything that goes against common sense unless you have first...

5 things to do every morning | inspirational thought

five things to do every morning Do you guys know something each one of you reading  this article has two very special gifts this morning guess what your eyes I often say last night was the last night for some and we are blessed with another chance to live a better life and we can make the most out of our day and thus out of our life if we begin our day in a proper state of mind here are the 5 things to dwell upon as soon as you're waking up every  single day number one begin your day with gratitude don't just charge your phones, watch tablets or laptops.   the first:-   thing in the morning charge yourself up as well with positivity that will last you all day and the most powerful of all positive emotions that'll make you feel empower and gratitude because it forces you to shift your attention to your blessings back to your problems which are anyways going to be an integral part of all of our lives.   second:- resolve to have a positive vision nobody including ...