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आप से बढ़कर कुछ नहीं

  आप से बढ़कर कुछ नहीं एक बार कि बात है- एक आदमी कही से गुज़र रहा था,तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा के उनके अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई हैं। उसे इस बात का बड़ा आश्चर्य हुआ के हाथी जैसे ताक़तवर जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं। उसने पास खड़े एक किसान से पूछा, के भला ये हाथी किस तरह इतनी शांति से खड़े हैं और भागने की कोसिस क्यो नहीं कर रहे? किसान बोला- इन हाथियों को छोटे पन से ही ये रस्सियों से बांधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती हैं के इस बंधन को वो तोड़ सके। बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी न तोड़ पाने की वजह से उन्हें धीरे-धीरे ये यक़ीन हो जाता हैं के वो इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते, और बड़े होने पर भी इनका ये यकीन बना रहता है! इसलिए वो कभी इन्हें तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते। वह आदमी आश्चर्य में पड़ गया, के ये जानवर इसलिए रस्सी नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात पर यकीन करते हैं, के वो ऐसा नहीं कर सकते। इन हाथियों की तरह ही हम में से कई लोग पहली बार मिली असफलता के कारण ये मान बैठते हैं के अब हमसे ये काम नहीं हो सकता। और अपनी ह...

short story for kids | चतुर खरगोश | हिंदी नैतिक कहानियाँ

चतुर खरगोश एक जंगल के पास एक सुंदर सा द्वीप था । उस जंगल और द्वीप के बीच में एक तालाब था । उस द्वीप पर जाने के लिए सबको वह तालाब पार करना पड़ता ।उस द्वीप पर खूब सारे स्वादिष्ट फल और सब्जियां थे । उस जंगल में रहने वाले सारे पशु उस द्वीप से फल सब्जियां खाना खाते थे । पर कभी किसी ने हिम्मत नहीं करी  । क्योंकि उस तालाब में कई सारे मगरमच्छ रहते  थे ।  एक दिन एक खरगोश जो उसे जंगल में रहती थी । उस तालाब से पानी पीने गई उससे वह द्वीप देखा और सोचने लगी  मुझे उस द्वीप पर जाकर सारे फल सब्जियां खाने हैं । मगर यह मगरमच्छ को कैसे चकमा दिया जाए । फिर बहुत सोचने पर खरगोश ने एक तरकीब सोची । अगली सुबह वह खरगोश तालाब के किनारे आई । उसने सारे मगरमच्छ को चिल्लाकर बुलाया किसके पास इतनी हिम्मत है । जो हमें ऐसे बुला रहा है । मगरमच्छो  ने सोचा और तालाब के किनारे आ गए । आप सब वादा करो कि मुझे हानि नहीं पहुंचा । ओगे वह अपनी होशियारी के साथ यह सब बोलना शुरू हो गयी ।  हां हां तुम चिंता मत करो बताओ क्या बात है । "एक मगरमच्छ बोला" जंगल के राजा ने सब जानवरों के लिए एक दावत देने का सो...

moral story of an employee | short story with moral

                                               moral story of an employee in a certain company a young employee went to the HR head manager and said I can’t work here any longer I want to quit this job the HR manager had asked why please tell me what happened? the whole atmosphere is so toxic to my mind replied, the young man there are people here who are into a lot of politics then there are those who talk negative all the time some spent most of their time gossiping than working, I don’t think I can handle this any longer the HR head manager said ok but, I want to request you one to make before you leave the man asked please tell me what can I do for you, sir but the HR manager had said I want you to do this one last thing sincerely I want you to take a glass of water filled to the brim and walk around the office area three times...